Kapeesh

शनिवार, 12 जून 2021

बचपन की यादें


 एक कहानी है पहचानी,

जिससे जुड़ी है सबकी जिन्दगानी।

बचपन की जो याद दिलाए,

दादी एक कहानी सुनाए।।1।।


एक लोरी की धुन थी अच्छी,

जो लगती थी एकदम सच्ची।

जिसे सुनकर हम सो जाते,

अच्छे सपनो मे खो जाते।।2।।


सभी थे समझाने वाले,

रूठने पर मनाने वाले।

जब कोई मारने आते,

मां के पास हम छुप जाते।।3।।


न कोई था रोकने वाला,

न कोई था रूठने वाला।

सब गोद मे थे उठाते,

बाबू लल्लू कह के बुलाते।।4।।


थोड़ी सी जो भूल हो जाती,

मां प्यार से थी समझाती।

पापा जब बाहर से आते,

खाने के लिए बिस्कुट थे लाते।।5।।


          Written by

           कपीश कुमार

        (Kapeesh Kumar)


रविवार, 23 मई 2021

वही देश है मेरा पहचान

 जिस धरती की सुन्दर पानी,

सभी की जिससे है जिन्दगानी।

जहां पर सब रहे एकसाथ,

वही देश है मेरा पहचान।।1।।


हवा जहां का शुद्ध शीतल है,

जहां पर झरने की कल-कल है।

चिड़ियों की जहां मधुर आवाज,

वही देश है मेरा पहचान।।2।।


भेदभाव सब के अन्दर है,

फिर भी बधे एक बन्धन में।

जहां पर सब है एक समान,

वही देश है मेरा पहचान।।3।।


जहां पर हर त्योहार होते है,

सभी लोग खुशहाल होते है।

अतिथो का जहां होता है सम्मान,

वही देश है मेरा पहचान।।4।।


सरल स्वभाव सभी के मन है,

करते प्रेम सभी है धन से।

पैसों के खातिर लेते जहां जान,

वही देश है मेरा पहचान।।5।। 

    

        Written by

    Kapeesh Kumar

मंगलवार, 18 मई 2021

ईंसान बनेंगे

 न हिन्दू बनेंगे,न मुस्लमान बनेंगे।

ईंसान के औलाद है, ईंसान बनेंगे।।

करेंगे सेवा देश की, उमंग मन में डाल के।

दुनिया में नाम करेंगे, कर्तव्य अपना मान के।।

सजाके अपने देश को, रखेंगे हम सम्भाल के।

मर जाएंगे भले ही, भारत माता के नाम पे।।

करेंगे ऐसा काम,न किसी से डरेंगे।

ईंसान के औलाद है, ईंसान बनेंगे।।


     Written by

    Kapeesh Kumar


शनिवार, 15 मई 2021

कोरोना वायरस

Kapeesh

 2020 की एक कहानी,

सुन कर मन मे हो हैरानी।

चली एक ऐसी वायरस,

जिससे बढ़ी बहुत परेशानी।।1।।


नाम कोरोना उसका था,

जो करता था मनमानी।

सोच मे थे देश के वासी,

लक्षण इसका सिर्फ था खाशी।।2।।


जुकाम बुखार जो आता था,

कोरोना चेक किया जाता था।

चीन का आविष्कार था ऐसा,

ईलाज मे लगे बहुत ही पैसा।।3।।


भयभीत बनाता था सबको यह,

नजदीकियों से बढ़ता था यह।

पीएम-सीएम परेशान थे इससे,

मजदूर अधिक मरते थे जिससे।।4।।


फिर पैदल यात्रा शुरू हुए,

काम-काज भी बन्द हुए।

स्कूल छात्र भी हुऐ परेशान,

पीछड़ गया उनका इक्जाम।।5।।


नवम्बर मे खुली स्कूल,

बन्द हुए जनता कर्फ्यू।

आई 2021 की बात,

फिर से कोरोना की आई बारात।।6।।


फिर कर्फ्यू का हुआ ऐलान,

दिखा रही है कोरोना शान।

भूख से मरते गरीब-किसान,

कौन बचाए किसकी जान।।7।।


छुआ छूत से बढ़ी बिमारी,

बन्द हो गई सबकी दुकानदारी।

लोग अगर इस समय मर जाए,

कोई उन्हें न हाथ लगाए।।8।।


लाशो से सब दूर हो जाए,

JCB से उन्हें दफनाए।

ऐसी समय गई है आई,

दूर-दूर रहे परिवार व भाई।।9।।


कोई उपाय समझ न आए,

तब पीएम लॉकडाउन लगवाए।

वाह विज्ञान तेरी अजब कहानी,

तेरे वजह से बढ़ी परेशानी।।10।।

         Writer

  कपीश कुमार (क्रिंत कुमार) 

 Kapeesh Kumar








शुक्रवार, 14 मई 2021

बुद्धा को प्रणाम करे

 एक देश भक्त एक राज भक्त,

जो देवो के अवतार हुए।

ऐसे परमारथ बुद्धा को,

हम सत-सत प्रणाम करे।।1।।


ये बीर पुरूष बलवान रहे,

सब लोगो के जो शान रहे।

जो राज पाठ को त्याग कर,

तप के लिए वनवास रहे।।2।।


जाति धर्म की लगी आग जहां,

वहा पर शीतल छांव बने।

जहां होते थे हरपल झगड़े,

वहां वे बन के ढाल रहे।।3।।


बुद्ध हमारे शान बने,

हम पीछड़ो के पहचान बने।

सब एक ही जन है दुनिया मे,

इसी शब्दों का पालन करे।।4।।


न भेदभाव हो हमारे मन मे,

हम मिलकर एक ही साथ रहे।

सेवा की भाव हो मन मे,

तो भारत देश महान बने।।5।।


ऐसे परमारथ बुद्धा को, हम सत-सत प्रणाम करे।।।।


          Written by

  Kapeesh Kumar, krint kumar

मंगलवार, 4 मई 2021

हमारी प्रीय शाली(part 4)

‌आयन उठावे जब फोनवा,

तब तक फोनवा कट गवा।

सोचेन की फोन मिलायी हम,

तइसे बैलेंस खतम भवा।।16।।


प्यार तो बढ़ा बहुत ज्यादा,

फिर एक बात हम ठान लिहन।

बैलेंस करावे के खातीर,

फलाने से पैंसा उधार लिहन।।17।।


फिर गयन करावे हम बैलेंस, 

बैलेंस भी सक्सेजफुल भई।

फिर किहन फोन शाली लगे,

शाली जब हमके भूल गई।।।18।


बोलिन के तुम बोल रहे,

हम आपन नाम बताय दिहन।

पछिन का हाल है तुमरे,

हम आपन हाल बताय दिहन।।19।।


फिर कुछ दिन तक चली बात,

बातो मे समय बिताइत हैं।

शाली हमरे बहुते प्यारी,

उनसे हम प्यार जताइत हैं।।20।। 

          Written by

  Kapeesh Kumar


सोमवार, 3 मई 2021

हमारी प्रीय शाली(part 3)

चढ़ गवा लवेरिया मूड़ी पर,
अब सोच भी हमसे दूर भवा।
चाहत के काटा अस चूभा,
जानव दिलवा के लय गवा।।11 ।।

 
अब हर पल उनके याद में,
आपन समय बिताइत हैं।
‌‌खाना भी अच्छा ना लागे,
पानी पीके रह जाइत हैं।।12।।

 
फिर किहन फोन हम एक दिना,
शाली जब घूमे गांव गयी।
उठाइन फोन उनके मम्मी,
सोची अब हमहू काव कही।।13 ।।

 
फिर हाल-चाल भवा फोने पर,
कउनो तरह से बात कीहन।
पुछिन भईया कहा है तोहरे,
बाहर गए हम बताय दिहन।।14 ।।

 
लग गवा है झटका हमरे दिल पर,
चाहत भी अब भूल गई गयन।
शाली जब हमरे फोन कीहिन,
तब तक हम फोन से दूर गयन।।15।।

     Written by

Kapeesh Kumar

बुधवार, 17 मार्च 2021

हमारी प्रीय शाली(part 2)

फिर हमहू धीरे से पर्ची,
पैर के नीचे दबाय लिहन।
धीरे-धीरे आगे बढ़के,
भउजी से जाइके बात किहन॥8॥
फिर भई बिदाई हम सब के,
हम धीरे से जब चल दिहन।
शाली हमरे देखत रह गई,
हम आपन दिल गवाय दिहन॥9॥
सोई न रात भर हम भईया,
दिनवा मे भी जाग रही।
कही भी देखी केहू के,
शाली समझ पीछे लाग रही॥10॥

मंगलवार, 16 मार्च 2021

भारत देश हमारा है

भारत देश हमारा है,
कितना प्यारा-प्यारा है।
भिन्न है इसके जन की भाषा,
भिन्न है धर्म और अभिलाषा।
भिन्न सभी की नारा है
भारत देश हमारा है॥1॥
मौसम है यहाँ प्यारी-प्यारी,
पहनावे है न्यारी-न्यारी।
रूप रंग सब अलग-अलग है,
बोल चाल सब अलग-अलग है।
खुशियो की यहाँ धारा है,
भारत देश हमारा है॥2॥

     Written by

  Kapeesh Kumar

सोमवार, 4 जनवरी 2021

हमारी प्रीय शाली( Part 1)

 सुना भईया एक कहानी है, 

कहानी बहुत पहचानी है।

हम बड़के भईया के साथ गयन, 

भईया के शादी के बात किहन।।1 ।।


 भउजी गेट पर खड़ी रही है, 

थाली मे मिठाई धरी रही।

हम देखी अपने शाली के , 

शाली दुआर पर खड़ी रही।।2 ।।


 हम गयन अच्चके मे देखा, 

शाली हमरे मुस्काय पड़ी।

हम जाना दूसरे के देखिए, 

पर हँस के बतलाय पड़ी। ३ ।।


दिलवा हमार धक-धक कईके, 

अचके मे शान्त जब भवा।

जईसे सोचन कुछ बोली हमहू, 

तब तक फलनवा आय गवा।।4 ।।


उ हमका बोलाय लिहिस, 

हम फिर अंदर चला गयन।

भइया हमके तिरछा देखिए, 

हम डर के पीछे खड़ा भयन ।5 ।।


शाली हमरे हुशियार रही, 

पन्ना मे नम्बर लिख फेकिन।

हम चुपके से नीचे झूकेन, 

तइसे भउजी बोलाय लिहिन ।।6 ।।


फस गयन हम बड़े दुविधा मे,

अब सोची हमने कहा जईबे

भउजी से अगर मिलब हमहू, 

तो शाली के पर्चि गवा देबे।।7 ।। 

Written by

Kapeesh Kumar

कविता

पूरब से जब सुरज आता है,

 पूरब से जब सुरज आता है, ☀☀ सब के मन को बहुत ही भाता है। चिड़िया की चह चह सुन कर के, सब जग तब उठ जाता है।।1।। चलती है हवाएं प्यारी प्यारी,  ...

हमारी प्रिय शाली