एक देश भक्त एक राज भक्त,
जो देवो के अवतार हुए।
ऐसे परमारथ बुद्धा को,
हम सत-सत प्रणाम करे।।1।।
ये बीर पुरूष बलवान रहे,
सब लोगो के जो शान रहे।
जो राज पाठ को त्याग कर,
तप के लिए वनवास रहे।।2।।
जाति धर्म की लगी आग जहां,
वहा पर शीतल छांव बने।
जहां होते थे हरपल झगड़े,
वहां वे बन के ढाल रहे।।3।।
बुद्ध हमारे शान बने,
हम पीछड़ो के पहचान बने।
सब एक ही जन है दुनिया मे,
इसी शब्दों का पालन करे।।4।।
न भेदभाव हो हमारे मन मे,
हम मिलकर एक ही साथ रहे।
सेवा की भाव हो मन मे,
तो भारत देश महान बने।।5।।
ऐसे परमारथ बुद्धा को, हम सत-सत प्रणाम करे।।।।