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Kapeesh
बुधवार, 17 मार्च 2021
हमारी प्रीय शाली(part 2)
फिर हमहू धीरे से पर्ची,
पैर के नीचे दबाय लिहन।
धीरे-धीरे आगे बढ़के,
भउजी से जाइके बात किहन॥8॥
फिर भई बिदाई हम सब के,
हम धीरे से जब चल दिहन।
शाली हमरे देखत रह गई,
हम आपन दिल गवाय दिहन॥9॥
सोई न रात भर हम भईया,
दिनवा मे भी जाग रही।
कही भी देखी केहू के,
शाली समझ पीछे लाग रही॥10॥
मंगलवार, 16 मार्च 2021
भारत देश हमारा है
भारत देश हमारा है,
कितना प्यारा-प्यारा है।
भिन्न है इसके जन की भाषा,
भिन्न है धर्म और अभिलाषा।
भिन्न सभी की नारा है
भारत देश हमारा है॥1॥
पहनावे है न्यारी-न्यारी।
रूप रंग सब अलग-अलग है,
बोल चाल सब अलग-अलग है।
खुशियो की यहाँ धारा है,
मौसम है यहाँ प्यारी-प्यारी,
भारत देश हमारा है॥2॥
Written by
Kapeesh Kumar
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