जिससे जुड़ी है सबकी जिन्दगानी।
बचपन की जो याद दिलाए,
दादी एक कहानी सुनाए।।1।।
एक लोरी की धुन थी अच्छी,
जो लगती थी एकदम सच्ची।
जिसे सुनकर हम सो जाते,
अच्छे सपनो मे खो जाते।।2।।
सभी थे समझाने वाले,
रूठने पर मनाने वाले।
जब कोई मारने आते,
मां के पास हम छुप जाते।।3।।
न कोई था रोकने वाला,
न कोई था रूठने वाला।
सब गोद मे थे उठाते,
बाबू लल्लू कह के बुलाते।।4।।
थोड़ी सी जो भूल हो जाती,
मां प्यार से थी समझाती।
पापा जब बाहर से आते,
खाने के लिए बिस्कुट थे लाते।।5।।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें