फिर हमहू धीरे से पर्ची,
पैर के नीचे दबाय लिहन।
धीरे-धीरे आगे बढ़के,
भउजी से जाइके बात किहन॥8॥
फिर भई बिदाई हम सब के,
हम धीरे से जब चल दिहन।
शाली हमरे देखत रह गई,
हम आपन दिल गवाय दिहन॥9॥
सोई न रात भर हम भईया,
दिनवा मे भी जाग रही।
कही भी देखी केहू के,
शाली समझ पीछे लाग रही॥10॥
Mast bhai
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